सोमवार, 20 सितंबर 2021

दुनिया चली अंतरिक्ष की ओर...मिल गया सैर-सपाटे का नया अड्डा!

 ये हफ्ता धरती पर रह रहे इंसानों के लिए अद्भुत साबित हुआ. वैसे तो इसका अनुभव दुनिया के सिर्फ चार लोगों ने लिया लेकिन उम्मीदें सबकी जगा गए. पहली बार चार लोग अंतरिक्ष टूरिज्म करके आ भी गए.



धरती पर इंसान जलवायु परिवर्तन, कोरोना वायरस महामारी समेत तमाम समस्याओं से जूझ रहा है तो क्या इंसान अब नया ठिकाना ढूंढ रहा है? इस हफ्ते इस दिशा में पहली कामयाबी इंसान ने हासिल की है. अमेरिकी बिजनेसमैन एलन मस्क की कंपनी SpaceX का पहला ऑल-सिविलियन क्रू अंतरिक्ष की सैर कर धरती पर लौट आया है. इसमें चार आम लोगों को स्पेस एक्स कैप्सूल से अंतरिक्ष भेजा गया था. इन लोगों ने तीन दिन अंतरिक्ष में गुजारे और फिर सुरक्षित वापस लौट आए.


चार यात्रियों में 38 साल के जेयर्ड आईजैकमैन, 51 साल के सियान प्रॉक्टर, 29 साल की महिला हेइली एक्रेनेऑक्स और 42 साल के क्रिस सेम्ब्रोस्की शामिल थे. इस यात्रा पर 200 मिलियन डॉलर का खर्च आया. पूरा खर्च इन चारों में शामिल जेयर्ड आईजैकमैन ने उठाया. आईजैकमैन ई-कॉमर्स कंपनी शिफ्ट 4 पेमेंट्स के सीईओ हैं. इंस्पिरेशन 4 के क्रू मेंबर्स का इस अंतरिक्ष यान को उड़ाने में कोई रोल नहीं था. इसे जमीन से ही ऑपरेट किया गया था. हालांकि, आईजैकमैन और प्रॉक्टर दोनों ही पायलट हैं.


चार लोगों की इस यात्रा ने स्पेस टूरिज्म के रास्ते खोल दिए हैं. अगर आपके पास पैसे हैं और घूमने का रोमांचक शौक है तो आप कुल्लू-मनाली, स्विटजरलैंड से आगे अंतरिक्ष तक भी घूमने निकल सकते हैं.

रविवार, 20 जून 2021

लाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है...

 ...सपना क्या है? नयन सेज पर,

सोया हुआ आँख का पानी,
और टूटना है उसका ज्यों,
जागे कच्ची नींद जवानी,
गीली उमर बनाने वालों! डूबे बिना नहाने वालों!
कुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है।
माला बिखर गई तो क्या है,
खुद ही हल हो गई समस्या,
आँसू गर नीलाम हुए तो,
समझो पूरी हुई तपस्या,
रूठे दिवस मनाने वालों!
फटी क़मीज़ सिलाने वालों!
कुछ दीपों के बुझ जाने से आँगन नहीं मरा करता है।
खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर,
केवल जिल्द बदलती पोथी।
जैसे रात उतार चाँदनी,
पहने सुबह धूप की धोती,
वस्त्र बदलकर आने वालों!
चाल बदलकर जाने वालों!
चंद खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।
लाखों बार गगरियाँ फूटीं,
शिकन न आई पनघट पर,
लाखों बार कश्तियाँ डूबीं,
चहल-पहल वो ही है तट पर,
तम की उमर बढ़ाने वालों!
लौ की आयु घटाने वालों!
लाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।
-गोपाल दास नीरज की कविता का एक हिस्सा...

रविवार, 13 जून 2021

उम्मीदों का दीया जल रहा है...


उम्मीदों का दीया जल रहा है...

आंधियों से लड़ रहा है...


ये पंक्तियां आज किसी एक इंसान के जीवन की कहानी नहीं है, बल्कि दुनिया के 8 अरब लोग कमोबेश इसी हालात से गुजर रहे हैं...पिछले 16 महीने ऐसे बीते हैं जैसे कैदखाने में बीते हों...जैसे जिंदगी में कोई उम्मीद ही न बची हो, जैसे सबकुछ ठहर सा गया हो... न इंसान अपने तरीके से जी सकता है, न अपने पसंद की जगहों पर जा सकता है, न पसंद की चीजें खा सकता है, न किसी से मिल सकता है...रिश्ते-नाते, जान-पहचान सब ठेंगे पर रखे जा चुके हैं...है न निराश होने वाली बात..लेकिन नहीं...रुकने का नाम नहीं है जिंदगी...न ठहरने का...बल्कि चलते रहने का नाम ही है जिंदगी...इन 16 महीनों ने काफी कुछ सिखाया भी हमें...जरा एक बार इन 16 महीनों की अपनी जिंदगी के पन्नों को पलटकर देखिए...


...कैसे अपनी छोटी सी दुनिया में खुश रहा जा सकता है, जीवन में किन अनावश्यक आदतों को छोड़ा जा सकता था, किन सीमित चीजों में ही बुलंदी के साथ जिया जा सकता है, शांत माहौल में अपने-आप से कैसे साक्षात्कार किया जा सकता है, सकारात्मक विचारों वाली और दुनिया को गढ़ने का इतिहास समेटें किताबें कैसे आपकी दोस्त हो सकती हैं, कैसे अपने आपको समाज-देश-दुनिया और इंसानी जीवन की वास्तविकताओं को समझने में खुद को बिजी किया जा सकता है..इन सब के कई पन्ने समेटे हैं ये 16 महीने...


एक बार इन पन्नों को पलटकर देखिए... आपके जीने के तरीकों में क्या बदलाव आए इन 16 महीनों में, कैसे हम एक मैनुअल इंसान से डिजिटल होते चले गए, कैसे हमने अपने जीवन के अधिकांश काम घर बैठे डिजिटली करने के उपाय खोज निकाले... साग-सब्जी की खरीद हो, बैंक के काम हों, दवाइयों से लेकर डॉक्टरों की सेवा लेने तक कैसे घर बैठे एक्सेस मिलने लगे... ये सब हमारी प्रगति भी तो हैं...


इतना आसान भी नहीं रहे ये संकट के महीने लेकिन मुश्किलों में ही नए रास्ते निकलते हैं..यही मानव इतिहास कहता है. तो रुकना नहीं है, थमना नहीं है...नए रास्तों को खोजना है, उनसे अपने आसपास सकारात्मक माहौल बनाना है. ये मुश्किल कब खत्म होंगी...पता नहीं लेकिन इनसे लड़ना तो हमें आ ही गया है.

सोमवार, 4 जनवरी 2021

...वो ऐप जिसपर भारत में कोरोना वैक्सीन के लिए आपको रजिस्ट्रेशन कराना होगा


Co-WIN App... भारत सरकार का आधिकारिक ऐप. देश के वे नागरिक जो हेल्थ वर्कर्स नहीं हैं वह वैक्सीन के लिए CoWIN ऐप पर सेल्फ-रजिस्टर कर सकते हैं, जिसके लिए उन्हें ये ऐप गूगल प्ले स्टोर या ऐपल ऐप स्टोर से डाउनलोड करना होगा. टीकाकरण को उपयोग के लिए लॉन्च किए जाने के बाद जो लोग ऐप पर पहले से पंजीकृत होंगे उन्हें जल्द से जल्द वैक्सीन मिल सकती है.


भारत में सरकार तीन चरणों में टीका लगवाएगी. पहले चरण में सभी फ्रंटलाइन हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और दूसरे चरण में आपातकालीन सेवाओं से जुड़े लोगों को कोरोना का टीका लगेगा. राज्य सरकारें इन लोगों का डेटा इकट्ठा करने में लगी हैं. तीसरे चरण में उन लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी, जो गंभीर बीमारियों के शिकार हैं. इसके लिए, Co-Win ऐप के जरिए सेल्फ रजिस्ट्रेशन प्रोसेस की जरूरत होगी.


कोरोना वैक्सीन की ट्रैकिंग और रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के लिए, Co-Win ऐप को 5 मॉड्यूल में बांटा गया है, जिसमें पहला प्रशासनिक मॉड्यूल, दूसरा रजिस्ट्रेशन मॉड्यूल, तीसरा वैक्सीनेशन मॉड्यूल, चौथा लाभान्वित स्वीकृति मॉड्यूल और पांचवां रिपोर्ट मॉड्यूल है. जो लोग टीकाकरण करवाना चाहते हैं, उन्हें पंजीकरण मॉड्यूल के तहत विवरण देना होगा. वैक्सीनेशन मॉड्यूल में, उनके विवरणों को सत्यापित किया जाएगा और लाभान्वित स्वीकृति मॉड्यूल उनके टीकाकरण के बारे में उन्हें एक सर्टिफिकेट भेजेगा.


CoWIN ऐप: Vaccine के लिए कैसे करें रजिस्टर?

1. देश के नागरिक जो स्वास्थ्य वर्कर नहीं हैं, वे CoWin ऐप पर रजिस्ट्रेशन मॉड्यूल के माध्यम से वैक्सीन के लिए रजिस्टर कर सकेंगे. CoWin ऐप को गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर के जरिए डाउनलोड किया जा सकता है.


2. Co-WIN वेबसाइट पर सेल्फ रजिस्ट्रेशन के लिए 12 फोटो आइडेंटिटी डॉक्यूमेंट्स- Voter ID, Aadhar card, driving license, passport और Pension document में से किसी एक की जरूरत होगी.


3. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक SMS आएगा. जिसमें अलॉटेड तारीख और वैक्सीनेशन का टाइम और जगह दी जाएगी.


रविवार, 3 जनवरी 2021

दो डोज जिंदगी की

नए साल के साथ ही भारत में कोरोना से उबरने की नई उम्मीदोंं ने भी जगह बना ली है. भारत दुनिया का अकेला देश बन गया है जिसने कोरोना की दो वैक्सीन्स को एक साथ मंजूरी दी है. ऑक्सफोर्ड-सीरम इंस्टीयूट की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है. लेकिन इसका टीकाकरण अभी सिर्फ सरकार ही करेगी. इसलिए किसी साइबर ठग गिरोह के भ्रमजाल में न फंसें. ये टीके अभी मेडिकल फील्ड से जुड़े लोगों और सुरक्षाबलों को ही दिया जाएगा.

शनिवार, 2 जनवरी 2021

New Year, New Hope @2021

साल बदल गया है, दशक बदल गया है और उम्मीदें भी...पिछला पूरा साल इस इंतजार में बीता है कि महामारी से कब निजात मिलेगी, कब दुनिया फिर पहले जैसी होगी. अब नए साल में नई उम्मीदें जगी हैं, दुनिया के फिर से पहले जैसे होने की, पहले जैसी चहल-पहल बाजारों में, मॉल्स मेंस सिनेमाघरों में, बाजारों में होने की. लेकिन इससे पहले चुनौतियां हैं टीकाकरण की. कोरोना वैक्सीन आने वाली है इस खबर ने उम्मीद जगाई है तो उससे पहले साइबर ठग लोगों को वैक्सीन के नाम पर ठगने की कोशिशों में भी जुट गए हैं. सतर्क रहें, सरकारी व्यवस्था के अनुसार चलें. क्योंकि ना तो हमें पता है कि वैक्सीन पर किसके दावे सही हैं किसके गलत, ईमेल-मैसेज-व्हाट्सऐप मैसेजेज में जो लिंक दिए जा रहे हैं वो ठगी के लिए है या सच में हैं. इसलिए इंतजार करें, कहीं भी क्लिक ना करें. सही सूचनाओं के अनुसार चलें. दुनिया बदलेगी, हालात बदलेंगे, फिर बेहतर होगा सबकुछ...

जंग कहां-कहां और कैसे कैसे असर डाल सकती है?

 समयकाल... साल 1941-1942 यूरोप में दूसरे महायुद्ध के छिड़े करीब दो साल हो गए थे. ब्रिटिश शासन में होने के बावजूद शुरू के दो साल भारत या दिल्...