साल बदल गया है, दशक बदल गया है और उम्मीदें भी...पिछला पूरा साल इस इंतजार में बीता है कि महामारी से कब निजात मिलेगी, कब दुनिया फिर पहले जैसी होगी. अब नए साल में नई उम्मीदें जगी हैं, दुनिया के फिर से पहले जैसे होने की, पहले जैसी चहल-पहल बाजारों में, मॉल्स मेंस सिनेमाघरों में, बाजारों में होने की. लेकिन इससे पहले चुनौतियां हैं टीकाकरण की. कोरोना वैक्सीन आने वाली है इस खबर ने उम्मीद जगाई है तो उससे पहले साइबर ठग लोगों को वैक्सीन के नाम पर ठगने की कोशिशों में भी जुट गए हैं. सतर्क रहें, सरकारी व्यवस्था के अनुसार चलें. क्योंकि ना तो हमें पता है कि वैक्सीन पर किसके दावे सही हैं किसके गलत, ईमेल-मैसेज-व्हाट्सऐप मैसेजेज में जो लिंक दिए जा रहे हैं वो ठगी के लिए है या सच में हैं. इसलिए इंतजार करें, कहीं भी क्लिक ना करें. सही सूचनाओं के अनुसार चलें. दुनिया बदलेगी, हालात बदलेंगे, फिर बेहतर होगा सबकुछ...
अपना देश भारत बदल रहा है, समाज बदल रहा है, बहुत कुछ अच्छा भी हो रहा है. तो रुकिए मत, चलते रहिए, बदलते रहिए खुद को आने वाले कल के अनुसार, बदलते हुए तकनीक के अनुसार, बदलते हुए पर्यावरण के अनुसार...क्योंकि चलते रहने का नाम ही है जिंदगी...
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जंग कहां-कहां और कैसे कैसे असर डाल सकती है?
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